Sat. Dec 4th, 2021

सिद्धपीठ अघोर आश्रम , जहाँ नवरात्रि में नवमी के दिन हवन और भंडारे में जुटते है देश विदेश से भक्त


डकरामा के अघोर आश्रम के बारे में लोग बताते है कि यह बाबा के द्वारा मानव की चार खोपड़ियों पर स्थित सिद्धपीठ है जहां माँ बगुलामुखी साक्षात विराजती है। इस सिद्धपीठ के बारे में कहा जाता है कि ये वो स्थान है जहां कभी मुर्दा भी जीवित हो उठा था।

बिहार                     


नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है , नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन होता है । शक्ति की आराधना तो सभी करते है ,लेकिन शक्ति की साधना और शक्ति के अलौकिक रूप के दर्शन करने हों तो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित , मुजफ्फरपुर – सीतामढ़ी रोड पर खनुआ घाट से पूरब स्थित डकरामा ग्राम के अघोर आश्रम आइए ।

यहाँ आपको मिलेंगे 55 वर्षों से शक्ति की साधना में लगे स्वामी शिवजी सिंह  ,जिन्होंने अपनी साधना से वाकसिद्धि प्राप्त कर ली है।। इनके द्वारा स्थापित अघोर आश्रम में कदम रखते ही आप अपने भीतर एक ऊर्जा का संचार महसूस करेंगे । डकरामा के अघोर आश्रम के बारे में लोग बताते है कि यह बाबा के द्वारा मानव की चार खोपड़ियों पर स्थित सिद्धपीठ है जहां माँ बगुलामुखी साक्षात विराजती है। इस सिद्धपीठ के बारे में कहा जाता है कि ये वो स्थान है जहां कभी मुर्दा भी जीवित हो उठा था।

प्रति वर्ष नवरात्र में बाबा शक्ति की घोर साधना करते हैं , नौ दिनों तक उपवास के साथ मां जगदम्बा की पूजा से यह स्थान एक दिव्य आभा से जगमगा उठता है । नवमी के दिन यहाँ हवन और भंडारे का आयोजन होता है । इस दिन स्वामी शिव जी सिंह के  देश विदेश में बड़े बड़े पदों पर आसीन भक्त भी उपस्थित रहते हैं ।  हजारों की संख्या में लोग नवमी के हवन ,कन्या पूजन और भंडारे में शामिल होते हैं । इस वर्ष 14 अक्टूबर को नवमी है और खास संयोग है कि इस दिन स्वामी जी का जन्म दिवस भी है ।

स्वामी जी के बारे में कई रहस्यमयी बातें प्रचलित है , युवावस्था में सेंट्रल बैंक में नौकरी लगी , ट्रेनिंग के दौरान ही पटना में अघोर साधक स्वामी नारायण के सम्पर्क में आए और वहीं से जीवन की दिशा बदल दी । विभिन्न स्थानों पर कठिन साधना की और अलौकिक रहस्यमयी विद्या का ज्ञान प्राप्त कर डकरामा लौट आए । सिद्ध पीठ की स्थापना की और जनकल्याण के लिए समर्पित हो गए। अघोर आश्रम के एक कमरे में इनका सिद्ध पूजा स्थल है ,जहाँ सालों , भक्त और कष्ट से पीड़ित लोग माता के दर्शन और बाबा का आशीर्वाद लेने आते है । बाबा किसी से कुछ नही लेते , जिसे कुछ देना होता है वह माता के समक्ष रख कर चला जाता है ।

नवरात्रि में अद्भुत दृश्य होता है , बिना अन्न जल के अनवरत नौ दिन बाबा की पूजा चलती है , नवमी को हवन होता है , डकरामा अघोर आश्रम के इस हवन को आपने देख लिया तो आपको सिद्धपीठ की शक्ति का अहसास हो जाएगा। बड़े हवन कुंड में कई घन्टे तक हवन होता रहता है , कमरे का तापमान मनुष्य की सहन क्षमता से कहीं ऊपर जा चुका होता है , लेकिन बाबा उसी तापमान में सिर्फ एक लाल धोती लपेटे हवन करते रहते है ।
पिछली बार जब मैं गया था तो , उस कमरे का अलौकिक ,अद्भुत दृश्य बाहर से ही मुझे खींच रहा था ,लेकिन कमरे का असहनीय तापमान मुझे रोक रहा था , मैं कमरे में प्रविष्ट होने की हिम्म्मत नही जुटा पा रहा था , स्वामी जी की ओर देखा ,वो बिल्कुल शांत भाव से मंत्र उच्चारण के साथ हवन करने में लगे थे । मैंने मन को शांत किया और माता रानी का नाम लेकर एक झटके में पूजा स्थल के पास जा कर खड़ा हो गया , हाथ जोड़ लिए । आगे माँ की प्रतिमा थी और पीछे हवन कुंड । अद्भुत , रहस्यमयी , शक्ति … का साक्षात अनुभव कर रहा था मैं … मेरा मुंह माँ की प्रतिमा के तरफ था लेकिन वहाँ का तापमान बेहद सामान्य था और पीछे हवन कुंड की गर्मी, एक ही कमरे में अलग तापमान कैसे ? ये थी सिद्ध पीठ अघोर आश्रम स्थित माँ बगलामुखी की शक्ति ।

अघोर आश्रम में वाकसिद्ध स्वामी शिवजी सिंह द्वारा वर्षों से लोग अपनी समस्याओ और कष्टों से निजात पा रहे हैं ।समस्याओं का निराकरण होने पर इस सिद्धपीठ पर लोगों की बढ़ती आस्था आश्रम में जमा होती भीड़ बता देती है । डकरामा का यह शक्ति स्थल देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चित है ।बाबा के कई भक्त विदेश में भी बसे है जो हर नवरात्र बाबा का दर्शन करने और माँ भगवती , काली का आशीर्वाद लेने शक्तिपीठ आते हैं ।


बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में , मुजफ्फरपुर – सीतामढ़ी रोड पर खनुआ घाट से पूरब स्थित है , डकरामा ग्राम में  अघोर आश्रम  …..

संपर्क सूत्र  –    +91 99737 99619




मनोज शर्मा


 

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