Sat. Sep 25th, 2021

अफगान सेना पर भड़के ‘जो बाइडन’ जब अफगान सैनिक ही नहीं लड़ते तो हम अपने बेटे-बेटियों को लड़ने क्‍यों भेजें? गलती नहीं दोहराऊंगा

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के हटते ही 20 साल बाद फिर तालिबान का राज हो चुका है , राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग चुके हैं।अफगानिस्तान में इस स्थिति के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की भी आलोचना हो रही है । लेकिन अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन ने जनता से कहा है कि अगर अफगानी सैनिक नहीं लड़ते तो मैं कितनी पीढ़ियों तक अमेरिकी बेटे-बेटियों को भेजता रहूं। उन्‍होंने कहा कि मेरा जवाब साफ है। मैं वो गलतियां नहीं दोहराऊंगा जो हम पहले कर चुके हैं।’

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद से काबुल में स्थितियां बिगड़ना शुरू हुईं और रविवार 16 अगस्त को तालिबान देश की राजधानी में घुस गया। राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद लड़ाकों ने राष्ट्रपति महल पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सोमवार को कई भयावह तस्वीरें सामने आईं जिसमें हजारों अफगान देश से भागने के लिए चलते हवाई जहाज पर लटकते हुए नजर आए। दुनिया के कई देशों में प्रदर्शन हो रहे हैं और अफगान अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ मार्च कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारतीय समयानुसार सोमवार देर रात अफगानिस्तान मुद्दे पर अमेरिका को संबोधित किया। अपने संबोधन में बाइडन ने अपने फैसले का बचाव किया और अफगान सेना पर जमकर बरसे।

दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के फैसले का बचाव करते हुए अफगान नेतृत्व को बिना किसी संघर्ष के तालिबान को सत्ता सौंपने के लिए जिम्मेदार ठहराया और साथ ही तालिबान को चेतावनी दी कि अगर उसने अमेरिकी कर्मियों पर हमला किया या देश में उनके अभियानों में बाधा पहुंचायी, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा। बाइडन ने अफगानिस्तान से आ रही तस्वीरों को अत्यंत परेशान करने वाली बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक किसी ऐसे युद्ध में नहीं मर सकते जो अफगान बल अपने लिए लड़ना ही नहीं चाहते।

बाइडन ने कहा कि वह अतीत में अमेरिका द्वारा की गयी गलतियों को नहीं दोहराएंगे। किसी संघर्ष में शामिल रहने और अनिश्चितकाल तक लड़ने की गलती अमेरिका के राष्ट्रीय हित में नहीं है। उन्होंने कहा, ”हम इन गलतियों को दोहरा नहीं सकते क्योंकि हमारे दुनिया में अहम हित हैं जिन्हें हम नजरअंदाज नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मैं यह भी मानता हूं कि हम में से ज्यादातर लोगों के लिए यह कितना दुखद है। अफगानिस्तान से जो दृश्य सामने आ रहे हैं वे अत्यंत परेशान करने वाले हैं।

उन्होंने कहा, ‘सच्चाई यह है कि यह सब कुछ हमारे अनुमान से कहीं ज्यादा जल्दी हुआ। तो, क्या हुआ? अफगानिस्तान के नेताओं ने हार मान ली और देश छोड़कर भाग गए। अफगान सेना पस्त हो गयी और वो भी लड़ने की कोशिश किए बिना। पिछले हफ्ते के घटनाक्रमों ने यह साबित कर दिया कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की भागीदारी को खत्म करना सही फैसला है।’

बाइडन ने साथ ही कहा कि अगर तालिबान अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के अभियानों में हस्तक्षेप करता है तो अमेरिका विध्वंसक बल के साथ जवाब देगा। उन्होंने कहा, ‘सेना की वापसी के साथ ही हमने तालिबान को स्पष्ट कर दिया है कि अगर उन्होंने हमारे कर्मियों पर हमला किया या हमारे अभियान में बाधा डाली तो त्वरित और जोरदार जवाब दिया जाएगा।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘हम जरूरत पड़ने पर विध्वंसकारी बल के साथ अपने लोगों की रक्षा करेंगे। हमारे मौजूदा अभियान का मकसद अपने लोगों और सहयोगियों को सुरक्षित और जल्द से जल्द बाहर निकालना है।’

बाइडन ने कहा, ‘हमने एक हजार अरब डॉलर से अधिक खर्च किए। हमने अफगानिस्तानी सेना के करीब 3,00,000 सैनिकों को प्रशिक्षित किया। उन्हें साजो-सामान दिए। उनकी सेना हमारे कई नाटो सहयोगियों की सेनाओं से कहीं अधिक बड़ी है। हमने उन्हें वेतन दिए, वायु सेना की देखरेख की, जो तालिबान के पास नहीं है। तालिबान के पास वायु सेना नहीं है। हमनें उन्हें अपना भविष्य तय करने का हर मौका दिया। हम उन्हें उस भविष्य के लिए लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं दे सकते।’




 

 

 

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