Sat. Jan 23rd, 2021

चमोली जनपद से बद्री गाय के घी की ऑनलाईन बिक्री शुरू

चमोली                                     

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में बद्री नस्ल की गाय पाई जाती है। उत्तराखंड की बदरी गाय को राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो की ओर से 40 वीं भारतीय  नस्ल की गाय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, यह एक मजबूत कद-काठी की छोटी गाय है जो उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाली जाती है। जनपद चमोली से अब इस गाय का पौष्टिक घी अमेजन पर ऑन लाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है।बदरी घी की ऑनलाइन बिक्री से जहां एक ओर पर्वतीय क्षेत्र की महिलाओं की आमदनी बढे़गी, वहीं बदरी गाय को भी संरक्षण मिलेगा।

वर्तमान में नरियाल गांव स्थित पशु प्रजनन केंद्र में करीब 350 बद्री गांयों का संवर्धन किया जा रहा है। बद्री गाय एक वक्त में एक से तीन किलो तक दूध देती है। इसका दूध गाढ़ा व पीला होता है। इस पहाड़ी गाय के दूध में 90 फीसद ए-2 जीनोटाइप बीटा केसीन पाया जाता है, जो डायबिटीज और हृदय रोगों को रोकने में कारगर है तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी उत्तम होता है।बदरी गाय का दूध औषधीय गुणों से युक्त होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सहायक होता है। चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों के द्वारा बद्री गाय के दूध से परम्परागत देशी तकनीक से घी बनाया जाता है। बदरी गाय के दूध से दही बनाने के लिए लकड़ी की मथनी से मथकर मक्खन निकाला जाता है । इस मथनी को स्थानीय भाषा मे बिलोना कहा जाता है। बिलोना से मक्खन निकालने के बाद महिलााएं इसे हल्की आंच पर गर्म करती है और कई घँटों के बाद धीमी आंच पर खौल कर घी तैयार होता है जो पौष्टिकता से भरपूर होता है। वर्तमान में जोशीमठ ब्लाक के अंतर्गत बदरी गाय घी के दो ग्रोथ सेंटर संचालित है, जिसमें महिला स्वयं सहायता  समूहों की ओर से इस परंपरागत विधि से घी तैयार किया जाता है। बकौल सहायक निदेशक (डेयरी) राजेंद्र सिंह चौहान – जनपद चमोली में बदरी घी के ग्रोथ सेंटर की सफलता से डेयरी विकास विभाग ने जनपद चमोली में पांच नए ग्रोथ सेंटर भी प्रस्तावित किए हैं।




नवीन भंडारी ,जोशीमठ


Photo: news Media , internet 

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