Mon. Jun 27th, 2022

जल है तो कल है- व्यक्तिगत पहल से बदलेगी दशा

मॉनसून की फ़ुहार शुरू हो गई गई है । झमाझम बारिश अब सुखद अहसास देने लगी है , धरती के सीने से लिपटी बेलियाँ और उसकी गोद मे बैठे वृक्ष अब झूमने लगे हैं , किसान अपने बैलों के गले मे घंटी बांध तैयार हैं । बारिश के बाद जब खेतों में बैल हल लेकर दौड़ते हैं तो घंटी की बजती आवाज किसान में एक ऊर्जा भर देती है ।



शिवप्रकाश भारद्वाज : –



लेकिन क्या बारिश का मौसम सिर्फ प्रकृति के मजे लेने के लिए है , अभी पूरे विश्व में एक गंभीर संकट पे मंथन चल रहा है और वो है धरती के गर्भ में घटता जल स्तर । समस्या गंभीर है , प्रयास भी गंभीर चाहिए  , पानी का कोई विकल्प नहीं है । जल के बिना हम जीवित नहीं रह सकते ।जल है तो कल है।

हर साल बारिश का पानी बर्बाद होता है और पानी की कमी से फसलें नही होती । देश के कई इलाकों में दूर से पानी ढो कर लेना पड़ता है । नदियाँ सूख रही है और कृषि के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नही ।

भारत मे जल की पर्याप्त उपलब्धता है लेकिन जल प्रबंधन में हमसे कहीं आगे है इजरायल । इसने जल प्रबंधन की तकनीक पर महारत हासिल कर ली है । रिसाइकिल्ड पानी के उपयोग से वह कृषि, उद्योग आदि को बेहतर संचालित करता है । भारत में जलकी पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद यहाँ बचत कम बर्बादी ज्यादा है ।

हाल के वर्षों में अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान ने जल संकट को और वृहत कर दिया है। बढ़ती आबादी प्रकृति से छेड़छाड़ और जल संरक्षण के प्रति उदासीनता ने भविष्य में जीवन पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है । 

जल है तो कल है ।बारिश प्रारम्भ होते ही जागें ,पानी को बाहर न जानें दें , आसपास के छोटे छोटे तालाबों में इन्हें इकट्ठा करें । बहते पानी को किसी गड्ढे , पेड़ की ओर मोड़ दें ।एक वृक्ष आसपास के लगभग 33% जल को अवशोषित कर लेता है ।  सूखे पड़े कुओं को पुनर्जीवित करें । जमीन में तालाब बनाकर , घर की छत पर पानी रोक कर उसे किसी टैंक में इकट्ठा कर लें।यह कुछ दिनों तक घरेलू कार्यों व बागवानी में काम आएगा । जल संकट से उबरने के लिए संरक्षण करना होगा और सिर्फ सरकार पर आश्रित न होकर हमें स्वयं पहल करनी होगी , व्यक्तिगत पहल से ही दशा बदलेगी ।


        न्यूज मंडी


 

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