Thu. Aug 18th, 2022

जानें क्या है F.I.R

F.I.R  यानि First Information Report अर्थात प्रथम सूचना प्राथमिकी , जिसमे सूचना किसी शिकायत या अभियोग के तौर पर किसी संज्ञेय अपराध के घटित या संभवतः घटित होने के बारे मेें पुलिस अधिकारी को दी जाती है । F.I.R पुलिस तक पहुचने वाली किसी सूचना की पहली रिपोर्ट होती है । इसका उद्देश्य फौजदारी कानून को हरकत में लाना है , जिससे कि पुलिस अन्वेषण का काम कर सके ।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(c) के अनुसार संज्ञेय अपराध का मतलब ऐसा अपराध है जिसमें पुलिस अधिकारी बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकता है ।किसी भी संज्ञेय मामले में पुलिस को यह अधिकार होता है कि वह बिना किसी अदालती आदेश के अपनी तरफ से जांच प्रारम्भ कर सकती है । किसी भी संज्ञेय अपराध के प्रति पुलिस स्टेशन में F.I.R  के पंजीकृत होने के बाद ही पुलिस मामले की जांच कर सकती है ।

कोई भी व्यक्ति जो एक संज्ञेय अपराध से व्यथित हो या उसकी तरफ से कोई दूसरा व्यक्ति जो उसके प्रति हो रहे अपराध को जानता है , वह F.I.R कर सकता है । एक पुलिस अधिकारी को भी यदि किसी संज्ञेय अपराध के बारे में पता चलता है तो वह भी F.I.R कर सकता है , मतलब F.I.R निम्नलिखित लोग कर सकते हैं :

  • जिसके खिलाफ अपराध किया गया हो ।
  • जो अपराध के बारे में जनता हो ।
  •  जिसने अपराध होते हुए देखा हो ।

F.I.R  में निम्न बातों का होना आवश्यक है :

  • सूचना देने वाले प्रत्यक्षदर्शी या गवाह अथवा शिकायतकर्ता का नाम एवं पता
  • घटना का दिन ,समय ,स्थान
  • अपराध का स्वरूप
  • अपराध में शामिल लोंगों का विवरण
  • अपराध का उद्देश्य
  • गवाहों के नाम पते

यदि पुलिस स्टेशन में आपकी F.I.R नहीं लिखी जा रही है तो इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक (S.P) या D.I.G या I. G जैसे पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से की जा सकती है । इस शिकायत को लिखित रूप से डाक द्वारा भी प्रेषित कर सूचना दी जा सकती है । उच्च अधिकारी यदि आपकी शिकायत सही पाते है तो संबंधित थाने को आदेश देते हुए करवाई कर सकते हैं ।

 

 

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