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टाटा ने 68 साल बाद एयर इंडिया को लिया वापस , रतन टाटा ने कहा – welcome back, Air India

रतन टाटा ने 68 साल बाद एयर इंडिया का वापस ले लिया ।  एयर इंडिया (Air India) की बिक्री के लिए लगी बोली टाटा सन्स  ने जीत ली है।  टाटा सन्स की इकाई Talace Pvt Ltd , 18000 करोड़ रुपये के साथ एयर इंडिया के लिए विनिंग बिडर रही। यह सौदा इस साल दिसंबर के अंत तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।

 एयर इंडिया की बोली जीतने के बाद टाटा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा  ने ट्वीट कर कहा, ‘Welcome Back, Air India’.

 

एयर इंडिया की शुरुआत टाटा समूह ने की थी और अब एक बार फिर से एयर इंडिया की कमान टाटा के हाथ में आ गई है। अंग्रेजों के जमाने मे 1932 में जब इसकी शुरुआत हुई थी तो इसे टाटा एयरलाइंस के नाम से जाना जाता था। बाद में इसका राष्ट्रीयकरण हो गया और कंपनी भारत सरकार की हो गई।जाने-माने उद्योगपति जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी। यह भारत में मेल और यात्रियों को ट्रांसपोर्ट करनेवाला पहला भारतीय कमर्शियल वाहक था। उचित सुविधाओं के अभाव में, फर्म को बॉम्बे की जुहू हवाई पट्टी पर छप्पर की छत वाली एक छोटी सी झोपड़ी में शुरू किया गया था।

ब्रिटेन की शाही रॉयल एयर फोर्स के पायलट होमी भरूचा टाटा एयरलाइंस के पहले पायलट थे जबकि जेआरडी टाटा और नेविल विंसेंट दूसरे और तीसरे पायलट थे। जेआरडी टाटा ने कराची से बंबई की उड़ान भरी थी। 15 अक्टूबर 1932 को इस उड़ान के दौरान उनके जहाज में डाक थी। बंबई के बाद नेविल विसेंट इस प्लेन को उड़ाकर चेन्नई ले गए थे।भारत के अलावा दक्षिण और पूर्व एशिया, मिडिल ईस्ट, यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और कनाडा में अपनी सेवाएं देती थी। तब कराची, अहमदाबाद, बॉम्बे, बेल्लारी और मद्रास के बीच सेवाएं दी जाती थीं। बाद में 1939 में रूट्स को त्रिवेंद्रम, दिल्ली, कोलंबो, लाहौर तक बढ़ाया गया।1946 में दूसरे विश्व युद्ध के वक्त विमान सेवाएं रोक दी गई थीं। जब फिर से विमान सेवाएं बहाल हुईं तो 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर उसका नाम एयर इंडिया लिमिटेड कर दिया गया। दो साल बाद मुंबई और कायरो, जेनेवा, लंदन के बीच इंटरनेशनल सेवाएं शुरू करने के लिए एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड बनाई गई। आजादी के बाद 1947 में एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी । 1953 में भारत ने सभी भारतीय एयरलाइंस को नेशनलाइज्ड कर दिया और दो कॉरोपोरेशन बनाए गए, एक घरेलू सेवाओं के लिए और दूसरा इंटरनेशनल सेवाओं के लिए। घरेलू सेवाओं के लिए लॉन्च एयरलाइन को इंडियन एयरलाइंस कॉरपोरेशन नाम दिया गया, जिसमें एयर इंडिया लिमिटेड के साथ 6 छोटी एयरलाइन्स को मर्ज किया गया।

यह भारत में अपनी तरह की पहली सार्वजनिक-निजी भागीदारी थी। भारत सरकार के पास 49% हिस्सेदारी थी, जबकि टाटा संस के पास 25% शेयर थे। बाकी शेयर्स सार्वजनिक निवेशकों के पास थे।

इंटरनेशनल सेवाओं के लिए बनी एयरलाइन को एयर इंडिया इंटरनेशनल कॉरपोरेशन कहा गया। पिछले कई सालों से एयर इंडिया नुकसान झेल रही है, ऐसे में सरकार ने इसके निजीकरण का फैसला लिया था। अब इसके लिए टाटा सन्स ने सबसे ऊंची बोली लगाकर करीब 68 साल बाद फिर से एयर इंडिया की कमान अपने हाथ में ले ली है।




 

 

 

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