Sat. Oct 31st, 2020

पालघर मामले में महाराष्ट्र पुलिस ‘सीबीआई ‘जाँच नही चाहती, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर किया विरोध


नई दिल्ली                                  

पालघर में दो साधुओं की निर्मम हत्या  के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग का विरोध करते हुए सोमवार 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दाखिल किया है , जिसमें कहा गया है कि मामले की सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज किए जाने के साथ ही याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए। महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि राज्य CID मामले में गहन जांच के बाद दो चार्जशीट दायर कर चुकी है. इन चार्जशीट को भी कोर्ट में भी जमा कराया गया है।

महाराष्ट्र पुलिस ने कहा कि विभागीय जांच में इस वारदात को रोकने में व अपनी ज़िम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाह पाए गए लोगों पर कार्रवाई की गई है। जांच में दोषी पाए गए अस्सिटेंट पुलिस इस्पेक्टर आनंदराव शिवाजी काले को सर्विस से बर्खास्त किया गया है. इसके अलावा असिस्टेंट पुलिस सब इस्पेक्टर रविन्द्र दिनकर सालुंनखे और हैडकांस्टेबल  नरेश ढोंडी  को कंपलसरी रिटायरमेंट दिया गया है। इस मामले में दोषी 15 दूसरे पुलिसकर्मियों को दो / तीन साल के लिए न्यूनतम सेलेरी  दिए जाने का दंड दिया गया है।

विदित हो कि 6 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में  सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से इस मामले में दायर चार्जशीट मांगी थी. साथ ही इस मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों  के खिलाफ कार्रवाई की ब्यौरा भी मांगा था। इसलिए महाराष्ट्र पुलिस की ओर से हलफनामे में उन पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का विवरण है, जिन्होंने अपराध को रोकने या अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही बरती। पुलिस के इस हलफनामे के अनुसार, उन्होंने उन सभी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ विभागीय जाँच की और जाँच के बाद जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए, उन्हें बर्खास्त किया गया या फिर उन्हें न्यूनतन आय की श्रेणी में डाल दिया गया।

पालघर मामले में सर्वोच्च न्यायालय इस केस में वकील शशांक शेखर झा, साधुओं के रिश्तेदार के अलावा पीठ श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा व कुछ अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में मामले की CBI और NIA से जाँच की माँग की गई है।

महाराष्ट्र के पालघर जिले के गढ़चिंचले गांव की सड़क पर 16 अप्रैल की रात 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ में पीट-पीटकर निर्मम हत्या कर दी थी। भीड़ ने जूना अखाड़े के महाराज कल्पवृक्ष गिरी और सहायक सुशील गिरी महाराज समेत ड्राइवर निलेश तेलगड़े की हत्या की थी। भीड़ को यह शक था की गाड़ी में सवार तीनों व्यक्ति बच्चा चोर हो सकते हैं। बस इसी अफवाह ने भीड़ में सोए शैतान को जगा दिया और सबने मिलकर लाठी-डंडों से तीनों व्यक्तियों की जान ले ली। इस घटना के समय पुलिस को भी देखा गया था। वीडियो में साफ पता चल रहा था कि पुलिस ने अपनी ड्यूटी को ठीक से नहीं निभाया और निर्दोष साधुओं को हत्यारी भीड़ के हवाले कर दिया। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच स्टेट सीआईडी को सौंपी थी। घटना होने के बाद स्थानीय पुलिस की लापरवाही उजागर होने लगी। तब राज्य सरकार ने स्थानीय एसपी गौरव सिंह को भी अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया था। मामले में पुलिस ने 154 लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें 11 लोग नाबालिग हैं।




News mandi desk


 

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