Fri. Oct 23rd, 2020

पूर्वी लद्दाख में चीन से निपटने को तैयार सेना, हजारों सैनिक, टैंक आमने-सामने…

नई दिल्ली                                 

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन दोनों देशों ने एक-दूसरे के आमने-सामने भारी संख्या में फौजियों, टैंकों, हथियारयुक्त वाहनों और हॉवित्जर तोपों को तैनात कर रखा है। इस बीच इंडियन आर्मी चीफ जनरल एम. एम. नरावणे ने गुरुवार को चुशूल सेक्टर पहुंचकर वहां की रक्षा तैयारियों का जायजा लिया। वहीं, एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने भी अग्रिम मोर्चों के सैन्य हवाई अड्डों का निरीक्षण किया।

पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर 29-30 की दरियानी रात और 31 अगस्त की रात चीनी सेना की ओर से घुसपैठ की कोशिश के कारण बढ़े तनाव बाद से ही भारत और चीन के बीच तल्खियां जारी है। भारत पैंगोंग झील के उत्तरी इलाकों से चीन को अपने सैनिकों को पीछे हटाने के लिए कह रहा है। चीन की कारस्तानी के कारण ही ब्रिगेडियर स्तर की पहले चार दिन हुई वार्ता में कोई हल नहीं निकल पाया। गुरुवार को पांचवें दिन की बैठक से भी किसी तरह के नतीजों के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच हालात और बिगड़ रहे हैं।

चीन ने पूर्वी लद्दाख के चुशूल सेक्टर के सामने भारी संख्या में फौजें भेज दी हैं। उससे पहले हथियारों और भारी युद्धक उपकरणों से पूरी तरह लैस भारतीय सैनिकों ने ठाकुंग (Thakung) से लेकर रेक इन दर्रा (Req in La) तक की सभी महत्वपूर्ण चोटियों पर अपनी मोर्चेबंदी मजबूत कर ली ताकि भविष्य में चीनी सेना के किसी भी दुस्साहसिक प्रयासों का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में हिस्सा लेने रूस की राजधानी मॉस्को में हैं जहां उन्होंने रूस के रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगू (General Sergei Shoigu) से मुलाकात की है। सूत्रों की मानें तो चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंगे (Wei Fenghe) ने भी अपने समकक्ष राजनाथ सिंह के साथ शुक्रवार को बैठक के लिए समय मांगा है। हालांकि अभी तक भारत की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।

एलएसी पर बिल्कुल विकट परिस्थितियों के बीच दोनों देशों ने सैन्य बातचीत का रास्ता खोलकर रखा है। चुशूल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर गुरुवार को चौथे दौर की ब्रिगेडियर स्तर की बातचीत हुई। हालांकि, इस बार भी बातचीत बेनतीजा रही।

चीन इस बात से हैरत में पड़ा है कि भारत ने 29-30 अगस्त की रात को कैसे पेंगोंग झील (Pangong Tso), स्पांगुर गैप (Spanggur Gap), रेजंग दर्रे (Rezang La) और रेंचिन पहाड़ियों से गुजरने वाले रेकिन दर्रे (Reqin La) पर अपनी मोर्चेबंदी कैसे कर ली।




News mandi desk


 

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