Sun. Apr 11th, 2021

प्रधानमंत्री ने कहा -बिजनेस करना सरकार का काम नहीं, कुछ सार्वजनिक उपक्रमों को छोड़कर सबका करेंगे निजीकरण

नई दिल्ली                         

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि खराब सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से देश की इकॉनमी पर बोझ पड़ता है।बिजनेस करना सरकार का काम नहीं है और उनकी सरकार रणनीतिक क्षेत्र में कुछ सीमित संख्या में सरकारी उपक्रमों (PSU) को छोड़कर बाकी क्षत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों को प्राइवेट करने को प्रतिबद्ध है।मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर आयोजित वेबिनार में कहा कि बजट 2020- 2021 में भारत को ऊंची बढ़ोतरी की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूपरेखा बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं। उन्होंने कहा व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं, सरकार का ध्यान जन कल्याण पर होना चाहिए। सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हुआ है या बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों को बाजार में चढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाये जाएंगे। पीएम मोदी ने कहा सरकार मौद्रिकरण, आधुनिकीकरण पर ध्यान दे रही है। निजी क्षेत्र से दक्षता आती है, रोजगार मिलता है। निजीकरण, संपत्ति के मौद्रिकरण से जो पैसा आएगा उसे जनता पर खर्च किया जाएगा।सरकार का अगले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। इन कंपनियों में बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पवन हंस, आईडीआई बैंक और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं। इसके अलावा जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी आएगा। साथ ही दो सरकारी बैंकों ओर एक साधारण बीमा कंपनी की बिक्री की जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सुधारों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल दक्षता से हो सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों को प्राइवेट करने को प्रतिबद्ध है।111 लाख करोड़ रुपये की नई राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पाइपलाइन (सूची) पर हम काम कर रहे है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विनिवेश की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह निवेशकों के मुद्दों को सुलझाने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को विकास पर ध्यान देना है और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम जब भी कारोबार करते हैं, तो घाटा होता है। उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है। इस पैसे का इस्तेमाल कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है।




News mandi desk


 

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