Sat. Jan 23rd, 2021

बिहार में बेबस नीतीश कुमार …

बिहार                           

पटना : बिहार में चौथी बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार भाजपा के साथ सरकार बनाकर खुश नहीं हैं। उनकी बेबसी और खीझ को तब खुलकर सामने आ गई जब शनिवार को  जदयू की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि चुनाव के वक्त उन्हें पता ही नहीं चला कि कौन उनका दोस्त है और कौन दुश्मन?

सरकार में वर्षों से राज कर रही जदयू इस चुनाव में सिर्फ 43 पर सिमट गई , और जदयू का कद छोटा करने में प्रत्यक्ष रूप से लोजपा और परोक्ष रूप से भाजपा की भूमिका रही , ऐसा बिहार चुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम बयान कर रहे हैं । बैठक में कई जदयू प्रत्याशियों ने इस बात को खुलकर कहा कि उनकी हार के लिए जिम्मेदार लोक जनशक्ति पार्टी नहीं बल्कि भाजपा है।

राजनीतिक विशेषज्ञ भी यह मान रहे हैं कि कद छोटा होने के बाद नीतीश को बिहार का नेतृत्व कांटों भरा ताज साबित होगा। जनता दल यूनाइटेड की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव परिणाम पर नेताओं की राय जाननी चाही तो दर्जन भर नेताओं ने जदयू की हार के लिए सहयोगी दल भाजपा को जिम्मेदार करार करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने जदयू की पीठ में छुरा भोंका है। अधिकांश नेताओं ने यही कहा कि चुनाव में लोजपा की कोई हैसियत नहीं थी,  सारा खेल भाजपा ने किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी अपनी बेबसी दिखाई और कहा कि भाजपा नेताओं के साथ हुई बातचीत में कैबिनेट विस्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई। जब तक पूरी बात नहीं हो जाती कैबिनेट विस्तार कैसे होगा। कैबिनेट विस्तार में इतनी देर पहले कभी नहीं हुई। मैं हमेशा पहले ही कैबिनेट विस्तार कर देता था।

निश्चय ही नीतीश कुमार की ये चौथी पारी काटों भरा ताज  है, क्योंकि भाजपा बड़ी संख्या में है और केंद्र में सरकार चला रही भाजपा की महत्वाकांक्षी योजना में बाधा बन नीतीश कुमार को कदम कदम पर दब कर चलना होगा ।

विपक्ष पूरे घटनाक्रम को देखकर मध्याविधि चुनाव की प्रबल संभावना जता रहे हैं , क्योंकि पाला बदलने में माहिर नीतीश के लिए राजद की तरफ से फिलहाल नो इंट्री का बोर्ड लगा है ।

अब देखना है कि धोखा खाए बेबस नीतीश की यह परेशानी कब तक चलती है , कब वे पिछले 15 वर्षों की तरह खुलकर बिहार विकास का रोड मैप तैयार कर पायेंगे।

 




विनीता शर्मा- News mandi bihar desk 


 

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