Sat. Jan 23rd, 2021

बिहार में शकील अहमद खान के संस्कृत में शपथ लेते ही सभी मेजें थपथपाने लगे

बिहार                                       

पटना: बिहार में जब एक मुस्लिम विधायक ने संस्कृत में शपथ ग्रहण पढ़ना शुरू किया तो उपस्थित राजनीतिज्ञ अचंभित हो गए । बिहार विधान सभा के कई सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनकी तारीफ की । 

विधान सभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार बन गई. नवगठित विधान सभा के पहले सत्र के पहले दिन सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ ग्रहण किया। एक ओर जहां ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन( AIMIM ) के विधायक अख्तरुल ईमान ने शपथ पत्र में लिखे हिंदुस्तान नाम पर आपत्ति जताते हुए इसे भारत लिखने की मांग की ,वहीं गंगा जमुनी संस्कृति की मिसाल कायम करते हुए कटिहार के कदवा क्षेत्र से विधायक शकील अहमद खान  ने संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण करधर्म की राजनीति करते लोगों को बड़ी राह दिखाई है।

संस्कृत में शपथ लेने के सवाल पर  शकील अहमद खान बेबाकी से कहते है कि , भारत विविधताओं का देश है .उर्दू  उनकी भाषा है , लेकिन संस्कृत हिंदुस्तान की रूह की जुबान है, यह सभ्यता और संस्कृति की भाषा रही है. यह अलग बात है कि समय गुजरने के बाद, आम लोगों की भाषा नहीं बन सकी।शपथ लेने के लिए पांच भाषाओं में दस्तावेज रखे हुए थे। संस्कृत में भी था। मैंने हिन्दुस्तान की क्लासिक जबान में ओथ लेने का फैसला किया। इसमें गलत क्या है। संस्कृत में बड़े बड़े महाकाव्य रचे गये हैं। एक से बढ़ कर एक किताबें लिखी गयीं हैं। पाणिनी का व्याकरण भी इसी भाषा में हैं। मैं उर्दू का भी उतना ही शैदाई हूं जितना कि संस्कृत का । उन्होंने कहा, ‘संस्कृत मुझे शुरुआत से ही अच्छी लगती है. सभी भाषाएं सही हैं. किसी भाषा से भेदभाव नहीं हो, किसी पर भाषा भी नहीं थोपी जाए, यह भी सरकार की पॉलिसी होनी चाहिए,  उन्होनें कहा कि, ‘आज बिहार सरकार  भाषा को लेकर क्या कर रही है. आज स्कूलों में मातृभाषा को लेकर शिक्षक तक नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यहां सभी जुबान है बोली जाती हैं। शपथ लेने के लिए पांच भाषाओं में दस्तावेज रखे हुए थे। संस्कृत में भी था। मैंने हिन्दुस्तान की क्लासिक जबान में ओथ लेने का फैसला किया। इसमें गलत क्या है। संस्कृत में बड़े बड़े महाकाव्य रचे गये हैं। एक से बढ़ कर एक किताबें लिखी गयीं हैं। पाणिनी का व्याकरण भी इसी भाषा में हैं। मैं उर्दू का भी उतना ही शैदाई हूं जितना कि संस्कृत का ।

देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके शकील अहमद खान की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल में हुई। पटना यूनिवर्सिटी से बीए करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय गये। वहां से उन्होंने एमए, एमफिल और पीएचडी का उपाधि हासिल की। 1999 में कांग्रेस में शामिल हो गये।यूपीए के पहले शासनकाल में उन्हें नेहरू युवा केन्द्र संगठन का महानिदेशक बनाया गया था।2015 के विधानसभा चुनाव में भी ये कदवा विधानसभा से जीते थे।2020 में उन्होंने लगातार दूसरी जीत हासिल की।




News mandi desk


 

 

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