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भारत के आसमान में 14 तारीख से दिखेगा एक धूमकेतु , नहीं देखे तो फिर 6000 साल बाद होंगे दर्शन

नियोवाइज नाम का यह धूमकेतु 5 किलोमीटर लंबा है, जिसका अगला हिस्सा तेजी से जलता हुआ निकलता है।इसके पीछे छोटी या लंबी रोशनी की पूंछ होती है।नासा के अनुसार नियोवाइज (Neowise) सूरज के चारों तरफ अपना चक्कर 6800 सालों में एक बार लगाता है. यानी यह हमारे सौर मंडल में अगली बार हजारों सालों के बाद वापस आएगा. यानी हमारी धरती पर अब ये 6000 साल बाद ही देखने को मिलेगा।
 New Delhi.                                   
14 जुलाई 2020 से आसमान में एक चमकीला धूमकेतु नजर आएगा जो अगस्त के पहले हफ्ते तक भारत मे खुली आँखों से देखा जा सकेगा। इसे देखने के लिए दूरबीन की जरूरत नहीं है। इस धूमकेतु का नाम नियोवाइज, नासा के नियर-अर्थ ऑबजेक्ट वाइड फील्ड इंफ्रारेड सर्वे एक्सप्लोरर (NEOWISE) मिशन के नाम पर रखा गया है। क्योंकि इसी मिशन ने इस धूमकेतु की खोज 27 मार्च 2020 में की थी।22 जुलाई 2020 को यह धरती के सबसे करीब, लगभग 103 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर होगा. फ़िलहाल यह सोलर सिस्टम के बाहर की तरफ जा रहा है।धरती के कई हिस्सों में यह धूमकेतु दिखाई पड़ा है. अब बारी है भारत की. लेकिन उससे पहले इसे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से भी देखा गया. जब यह पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा था. तब इसकी तस्वीरें नासा के एस्ट्रोनॉट बॉब बेकन ने 5 जुलाई को अंतरिक्ष में बने इंटरनैशनल स्पेस सेंटर से ली थी।धूमकेतु की लंबाई करीब 5 किलोमीटर है, जिसकाअगला हिस्सा तेजी से जलता हुआ निकलता है. इसके पीछे छोटी या लंबी रोशनी की पूंछ होती है। 

इसी को देखते हुए बॉब बेकन ने इस धूमकेतु की तस्वीर पोस्ट कर कहा था -बीती रात को आतिशबाजी, वास्तविक, विज्ञान की वजह से’। यह धूमकेतु इस बार के बाद अगले 6000 सालों तक नजर नहीं आएगा। इसे सुबह होने के आधे घण्टे पहले देखा जा सकता है। नियोवाइज नाम का यह धूमकेतु 5 किलोमीटर लंबा है, जिसका अगला हिस्सा तेजी से जलता हुआ निकलता है।इसके पीछे छोटी या लंबी रोशनी की पूंछ होती है।नासा के अनुसार नियोवाइज (Neowise) सूरज के चारों तरफ अपना चक्कर 6800 सालों में एक बार लगाता है. यानी यह हमारे सौर मंडल में अगली बार हजारों सालों के बाद वापस आएगा. यानी हमारी धरती पर अब ये 6000 साल बाद ही देखने को मिलेगा।




News mandi desk


 

 

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