Sat. Oct 31st, 2020

‘2 अक्टूबर’ उत्तराखंड के इतिहास का वो काला दिन …सुनकर रूह कांप जाती है

देश भर में 2 October को महात्मा गांधी जयंती मनाई जाती है लेकिन इस दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक ऐसी घटना हुई जिसे याद कर लोग मर्माहत हो जाते है।

उत्तराखंड                                  

बात 2 अक्टूबर 1994 की है।अलग राज्य उत्तराखंड की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने 2 अक्टूबर 1994 को दिल्ली में प्रदर्शन करना तय किया ।उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी।आंदोलन कारियों को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन तैयार था ,  प्रदेश सरकार ने मुज़फ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर पुलिस और पीएसी की पूरी छावनी बना कर नाकेबंदी कर दी।जैसे ही ये आंदोलनकारी मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पहुंचे थे, पुलिस प्रशासन ने कहर बरपाया की देखने सुनने वालों की रूहें कांप गई।

सैंकडों की संख्या में अलग राज्य उत्तराखंड के गठन की मांग के लिए पहाड़ों में बसे लोग ,जिनमे काफी संख्या में महिलाएं भी थी आगे बढ़ रही थी ।जब आगे जाने से रोका गया तो पब्लिक भड़की और पत्थरबाजी शुरू हुई। पुलिस की तरफ से लाठीचार्ज हुआ और गोलियां चलीं ।महिलाओं के साथ जो घोर अभद्रता हुई। लाशों के ढेर बिछे। पुलिस पर लाश गायब करने के आरोप भी लगे।गाड़ियां जला दी गईं।मुज़फ्फरनगर के स्थानीय लोगों ने कई आंदोलनकारियों की मदद की , जाने बचाई।

पुलिस ने अपने बचाव में एफआईआर में कहा कि आंदोलनकारियों ने दुकानें और गाड़ियां जला दीं. जिसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों को फायरिंग का आदेश देना पड़ा. 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई । 1995 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच का आदेश दिया. 28 पुलिसवालों पर बलात्कार, डकैती, महिलाओं से बदसलूकी, हिंसा और महिलाओं के साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता के केस दर्ज हुए।

तात्कालीन मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने रिटायर्ड जस्टिस ज़हीर हसन को इस कांड से इसकी जांच करवाई. जांच रिपोर्ट में कहा गया कि मौके की नज़ाकत को देखते हुए बल प्रयोग किया, जो बिल्कुल सही था. ‘रबर बुलेट’ फायर किए गए, जिससे अनावश्यक रूप से कुछ प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।

 2000 में उत्तराखंड एक अलग राज्य बन गया, लोगों को लगा कि इसके बाद राज्य की सरकार दोषी पुलिसवालों पर सख्ती से कार्रवाई करेगी लेकिन सब लीप पोत कर बराबर कर दिया गया ।

इस कांड पर राजनीतिक पार्टियाँ अपनी रोटी सेंकती रही और रामपुर तिराहा कांड में मृतकों को शहीद के रूप में श्रद्धांजलि देने की परिपाटी शुरू हुई। सभी बड़े नेता इस कांड का नाम लेकर मुख्यमंत्री बन गए। उत्तराखंड ने  राज्य गठन के बाद आठ मुख्यमंत्री देखे ।आंदोलनकारियों की याद में 2 अक्टूबर को मुज़फ्फरनगर में रामपुर तिराहे पर बनाये गये उत्तराखंड शहीद स्मारक पर हर वर्ष मुख्यमंत्री श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।




News mandi desk


 

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