Sat. May 21st, 2022

सिद्धपीठ ‘डकरामा’ जहाँ ‘नवमी’ में दिखता है अद्भुत अलौकिक दृश्य

पटना:- बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के डकरामा स्थित सिद्धपीठ के स्वामी शिवजी सिंह की बात निकलते ही , दशहरे के दिन का वह अलौकिक अद्भुत दृश्य जेहन में उतर आता है । उस दिन नवमी थी , कन्या पूजन कर बाबा के पास जाना था । सिद्ध पीठ, डकरामा । लोगों से सुना था दशहरे में , बाबा जब पूजा करते है तो साक्षात भगवती विराजती हैं। पटना से चार बजे हमलोग निकले , रास्ते भर जगह जगह माँ की प्रतिमा के पास से आती हवन की खुशबू ने रोम रोम पवित्र कर दिया । रास्ते भर मेले सा माहौल मिलने से मन सकारात्मक ऊर्जा और आनन्द से भर गया था । सात बजे हमलोग डकरामा पहुंचे । सिद्धपीठ के बाहर पुलिस की गाड़ियाँ और सैंकड़ों लोगों को देखकर अचंभित हो गया । आश्रम में प्रविष्ट होते ही पता चला एस. पी साहब आए हुए हैं ।

 

बाबा हवन कर रहे थे , काफी भीड़ थी ,बाहर बैठ गया । परिजनों के बुलाने पर जब बाबा के सिद्धपीठ स्थित पूजा के कमरे के पास गया तो अद्भुत नजारा देखा , आँखे आश्चर्य से फटी रह गई । एक बड़े से हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित थी और टोकरियों में भरकर रखी हवन सामग्री से बाबा हवन कर रहे थे ।करीब पांच छह घंटे से हवन चल रहा था । कमरे का तापमान मानव शरीर के सहने की क्षमता से बाहर हो चुका था ,लेकिन बाबा हवन में लीन थे । मैंने कमरे में जाने की कोशिश की लेकिन तुरन्त ही पाँव पीछे खींच लिए ।अंदर का तापमान असहनीय था ।

सचमुच बाबा के पास सिद्धि की ताकत है ,अन्यथा जिस तापमान में एक मिनट भी खड़े रहना मुश्किल है उसमें बाबा शिवजी सिंह लगातार पाँच घण्टे से डटे थे । महिलाएँ कमरे में जा रहीं थी ,हवन कुंड के पास पूजनस्थल में माँ भगवती , माँ बगलामुखी और माँ काली की स्थापित प्रतिमा के पास वो पूजा कर रही थी । उन्हें देखकर मुझमे भी हिम्मत हुई और मैं तेजी से पूजा स्थल में प्रविष्ट हुआ ,सीधा माँ की प्रतिमा की तरफ मुंह कर हाथ जोड़ लिए ।अद्भुत ,अलौकिक ,आश्चर्य से परिपूर्ण भाव चेहरे पर उतर आए , माँ की प्रतिमा के पास तो हवन कुंड की गर्मी थी ही नहीं। ये कैसे संभव है , कमरे के मध्य में जलते हवनकुंड के ताप का प्रभाव पास ही स्थित प्रतिमा के पास नहीं था ।भगवती के प्रभाव से सिद्धपीठ की अलौकिक शक्ति का साक्षात दर्शन किया ।

पूजन कर जब वापस हवन कुंड के पास आया तो उसी जला देने वाले तापमान का अहसास , लेकिन इस बार मन मे एक आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस हुई , वहाँ बैठकर हवन कुंड में हवन किया और बाबा को प्रणाम निवेदित कर बाहर आ गया ।आश्रम से कुछ दूरी पर उसी प्रांगण में बने बाबा के निवास स्थान में कन्या पूजन की तैयारी हो रही थी । कन्याओं को बैठाया गया और थोड़ी देर में बाबा हवन पूर्ण कर आए , दो लोग कंधे का सहारा दिए हुए थे , नौ दिनों से उपवास कर पूजा में लीन बाबा ने कन्याओं के पास जाकर उनके पैर धोए ,प्रणाम किया और उन्हें भोजन ग्रहणकरवाया  बाबा स्नान करने के पश्चात अपने कमरे में गए , वहाँ प्रतीक्षा कर रहे मुजफ्फरपुर के तत्कालीन एस.पी , मनोज कुमार ने बाबा को खीर खिलाई ,और वहीं बैठे बेगूसराय ,भारद्वाज गुरुकुल के निदेशक शिव प्रकाश भारद्वाज ,बाबा के पैर दबाने लगे । करीब दस मिनट के बाद बाबा पुनः अपने सिद्धपीठ पूजन स्थल पर चले गए ,अब मिलने वालों की लाइन लग गई । इधर आगन्तुकों के लिए भंडारे की तैयारी थी । पूड़ी ,सब्जी और खीर । लोग एक एक कर बाबा के पास दर्शनों के लिए जा रहे थे और अपनी समस्याएँ भी रख रहे थे । बाबा सबको समस्याओं से मुक्ति और खुशहाल जीवन का आशीर्वाद दे रहे थे ।

थोड़ी भीड़ कम होने पर मैं भी परिजनों के साथ बाबा के पास गया , बाबा ने हाल समाचार पूछा और पारिवारिक एवम व्यावसायिक जीवन में खुशहाली और सफलता का आशीर्वाद दिया । मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी रोड से 15 किलोमीटर दूर खनुआ घाट से पूरब स्थित डकरामा में स्वामी शिवजी सिंह द्वारा स्थापित सिद्धपीठ वास्तव में अलौकिक शक्ति का केंद्र है । दशहरे में इस सिद्ध पीठ में हजारों की संख्या में लोग आते हैं । देश ही नही विदेशों में बैठे भक्त भी इस दिन बाबा के पास जरूर आते हैं ।




मनोज शर्मा:-


 

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