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DRDO द्वारा विकसित दवा 2-DG को मिली आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी, कोविड मरीजों के लिये होगी रामबाण दवा

 

New Delhi                         

DCGI (ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया) ने कोविड-19 रोगियों के इलाज में एक और दवा 2-DG (2-deoxy-D-glucose) के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। शनिवार (मई 08, 2021) को रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने डॉ रेड्डी, हैदराबाद की प्रयोगशालाओं (डीआरएल) के साथ इस मॉलिक्यूल को विकसित किया है।क्लिनिकल टेस्टिंग के तीसरे चरण में पता चला है कि यह मॉलिक्यूल अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को तेजी से स्वस्थ करता है और उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता को भी कम करता है।


इस दवा को 2-deoxy-D-glucose (2-DG) नाम दिया गया है और इसका निर्माण डॉ. रेड्डी लैबोरेट्रीज करेगी। दवा के क्लीनिकल ट्रायल्स सफल साबित हुए हैं। दावा है कि जिन मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया, उनमें तेजी से रिकवरी देखी गई,साथ ही मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हो गई। यानी ये दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों के जल्द ठीक होने में मदद करने के साथ-साथ अतिरिक्त ऑक्सीजन की निर्भरता को कम करती है। डीजी दवा पाउडर के रूप में एक पैकेट में आती है, इसे पानी में घोल कर पीना होता है। ये दवा संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरल सिंथेसिस और एनर्जी प्रोडक्शन कर वायरस को बढ़ने से रोकती है। तीसरे फेज के ट्रायल में इसकी पुष्टि हुई।


इस ड्रग 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) को DRDO के इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेस (INMAS) और हैदराबाद सेंटर फ़ॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (CCMB) ने मिलकर तैयार किया है। न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS-DRDO) के वैज्ञानिक डॉ सुधीर चांदना ने इस पर बात करते हुए कहा, “हमने अप्रैल, 2020 में कोविड-19 ड्रग को लेकर एक महत्वपूर्ण काम शुरू किया था। हमने सीसीएमबी हैदराबाद में पहला एक्सपेरीमेंट किया, जिसमें वायरस पर 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) के असर का पता किया। इसमें काफी अच्छे परिणाम सामने आए।” डॉ सुधीर ने बताया कि भारतीय ड्रग नियामक संस्था DCGI से उन्होंने क्लीनिकल ट्रायल की स्वीकृति माँगी थी, जिसके बाद क्लीनिकल ट्रायल मई, 2020 से शुरू किए गए और इसके दूसरे चरण के ट्रायल अक्टूबर, 2020 तक चले।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दवा पाउच में पाउडर के रूप में आती है जिसे पानी में घोलकर मरीज को पिलाई जाती है। यह दवा कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस के विकास को रोकती है।




 

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